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राजस्थान के भौगोलिक प्रदेश

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By NotesMind
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भारत के उत्तर-पश्चिम में स्थित राजस्थान क्षेत्रफल की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा राज्य है। यह राज्य अपनी विविध भौगोलिक संरचना, जलवायु, मिट्टी, पर्वतों, पठारों और मरुस्थलीय क्षेत्रों के कारण विशेष पहचान रखता है। राजस्थान का भूगोल केवल प्राकृतिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि आर्थिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

राजस्थान की धरातलीय संरचना में अत्यधिक विविधता देखने को मिलती है। राज्य के पश्चिमी भाग में विशाल थार मरुस्थल फैला हुआ है, जबकि मध्य भाग में प्राचीन अरावली पर्वतमाला स्थित है। दूसरी ओर पूर्वी राजस्थान में उपजाऊ मैदान और नदी बेसिन पाए जाते हैं तथा दक्षिण-पूर्वी भाग में पठारी क्षेत्र विकसित हुआ है। इसी विविधता के आधार पर राजस्थान को विभिन्न भौगोलिक प्रदेशों में विभाजित किया गया है।

राजस्थान के भौगोलिक प्रदेशों का अध्ययन प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे RPSC, REET, Rajasthan GK, Patwari, SI, Police, CET तथा अन्य सरकारी परीक्षाओं में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। परीक्षाओं में अक्सर यह पूछा जाता है कि राजस्थान में कितने भौगोलिक प्रदेश हैं, उनका क्षेत्रफल कितना है, उनकी प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं तथा कौन-कौन से जिले उनमें शामिल हैं।

इस अध्याय में राजस्थान के प्रमुख भौगोलिक प्रदेशों, उनकी जलवायु, मिट्टी, भू-आकृतिक संरचना, कृषि, प्राकृतिक संसाधन तथा उनसे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।


राजस्थान का भौगोलिक स्वरूप

राजस्थान का कुल क्षेत्रफल लगभग 3.42 लाख वर्ग किलोमीटर है। यह भारत के कुल क्षेत्रफल का लगभग 10.4 प्रतिशत भाग है। राज्य का अधिकांश भाग शुष्क एवं अर्ध-शुष्क जलवायु वाला है।

राजस्थान की सीमाएँ—

  • उत्तर में पंजाब
  • उत्तर-पूर्व में हरियाणा
  • पूर्व में उत्तर प्रदेश
  • दक्षिण-पूर्व में मध्य प्रदेश
  • दक्षिण-पश्चिम में गुजरात
  • पश्चिम में पाकिस्तान

से मिलती हैं।

राज्य का भौगोलिक विस्तार उत्तर से दक्षिण तक लगभग 826 किलोमीटर तथा पूर्व से पश्चिम तक लगभग 869 किलोमीटर है।


राजस्थान के भौगोलिक प्रदेश

भौगोलिक दृष्टि से राजस्थान को सामान्यतः चार प्रमुख भौगोलिक प्रदेशों में विभाजित किया जाता है। यह विभाजन भूमि संरचना, जलवायु, मिट्टी, वनस्पति तथा प्राकृतिक परिस्थितियों के आधार पर किया गया है।

राजस्थान के चार प्रमुख भौगोलिक प्रदेश

  1. पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश
  2. अरावली पर्वतीय प्रदेश
  3. पूर्वी मैदान एवं नदी बेसिन प्रदेश
  4. दक्षिण-पूर्वी पठारी प्रदेश (हाड़ौती क्षेत्र)

राजस्थान के भौगोलिक प्रदेश – सारणी

भौगोलिक प्रदेश क्षेत्रफल (%) जनसंख्या (%) प्रमुख विशेषता
पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश लगभग 61% लगभग 40% थार मरुस्थल, रेतीली भूमि
अरावली पर्वतीय प्रदेश लगभग 9% लगभग 10% प्राचीन पर्वतमाला
पूर्वी मैदान एवं नदी बेसिन लगभग 23% लगभग 39% उपजाऊ कृषि क्षेत्र
दक्षिण-पूर्वी पठारी प्रदेश लगभग 6–7% लगभग 11% हाड़ौती का पठार

यह सारणी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।


1. पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश

पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश राजस्थान का सबसे बड़ा भौगोलिक क्षेत्र है। इसे थार मरुस्थल के नाम से भी जाना जाता है। यह क्षेत्र राजस्थान के पश्चिमी भाग में फैला हुआ है और पाकिस्तान सीमा तक विस्तृत है।

यह प्रदेश मुख्य रूप से—

  • जैसलमेर
  • बाड़मेर
  • बीकानेर
  • जोधपुर
  • श्रीगंगानगर
  • हनुमानगढ़
  • नागौर के कुछ भाग

में फैला हुआ है।


पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश की प्रमुख विशेषताएँ

1. रेतीली भूमि

इस क्षेत्र की भूमि मुख्यतः रेतीली होती है। यहाँ रेत के विशाल टीले पाए जाते हैं जिन्हें बालुका स्तूप या Sand Dunes कहा जाता है।

2. कम वर्षा

यहाँ वर्षा अत्यंत कम होती है। औसत वार्षिक वर्षा लगभग 10 से 40 सेंटीमीटर तक रहती है।

3. अत्यधिक तापमान

गर्मियों में तापमान बहुत अधिक हो जाता है। दिन और रात के तापमान में काफी अंतर देखा जाता है।

4. विरल वनस्पति

कम वर्षा के कारण यहाँ प्राकृतिक वनस्पति कम पाई जाती है। कंटीली झाड़ियाँ अधिक मिलती हैं।

5. शुष्क जलवायु

यह क्षेत्र शुष्क एवं अर्ध-शुष्क जलवायु वाला है।


पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश के उपभाग

इस प्रदेश को दो भागों में बाँटा जाता है—

शुष्क मरुस्थल

जैसलमेर और बाड़मेर क्षेत्र

अर्ध-शुष्क मरुस्थल

बीकानेर और नागौर क्षेत्र


मरुस्थलीय प्रदेश की नदियाँ

इस क्षेत्र में स्थायी नदियाँ बहुत कम हैं। अधिकांश नदियाँ बरसाती होती हैं।

प्रमुख नदियाँ

  • लूणी नदी
  • घग्घर नदी (कुछ भागों में)
  • काकनी नदी

कृषि

कम वर्षा के बावजूद सिंचाई परियोजनाओं के कारण कृषि का विकास हुआ है।

प्रमुख फसलें

  • बाजरा
  • मूंग
  • मोठ
  • ग्वार
  • चना

इंदिरा गांधी नहर परियोजना ने इस क्षेत्र के कृषि विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।


मरुस्थलीय मिट्टी

यहाँ मुख्य रूप से रेतीली मिट्टी पाई जाती है।

विशेषताएँ

  • जल धारण क्षमता कम
  • कार्बनिक पदार्थ कम
  • क्षारीयता अधिक

2. अरावली पर्वतीय प्रदेश

अरावली पर्वतमाला भारत की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में से एक है। यह राजस्थान के दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व दिशा में फैली हुई है।

अरावली पर्वतमाला राजस्थान को दो भागों में विभाजित करती है—

  • पश्चिमी शुष्क मरुस्थलीय क्षेत्र
  • पूर्वी उपजाऊ क्षेत्र

अरावली पर्वतमाला का विस्तार

यह पर्वतमाला गुजरात से प्रारंभ होकर राजस्थान से होती हुई हरियाणा और दिल्ली तक जाती है।

राजस्थान में इसका विस्तार लगभग 550 किलोमीटर तक है।


अरावली क्षेत्र के प्रमुख जिले

  • उदयपुर
  • राजसमंद
  • सिरोही
  • पाली
  • अजमेर
  • अलवर
  • सीकर
  • झुंझुनूं

अरावली क्षेत्र के भाग

1. उत्तरी अरावली क्षेत्र

अलवर, जयपुर, सीकर क्षेत्र

2. मध्य अरावली क्षेत्र

अजमेर और राजसमंद क्षेत्र

3. दक्षिणी अरावली क्षेत्र

उदयपुर और सिरोही क्षेत्र


प्रमुख विशेषताएँ

1. प्राचीन पर्वतमाला

अरावली विश्व की सबसे प्राचीन वलित पर्वतमालाओं में से एक मानी जाती है।

2. वन संपदा

इस क्षेत्र में राजस्थान के अन्य भागों की तुलना में अधिक वन पाए जाते हैं।

3. खनिज संपदा

अरावली क्षेत्र खनिजों के लिए प्रसिद्ध है।

प्रमुख खनिज

  • संगमरमर
  • जस्ता
  • तांबा
  • सीसा
  • ग्रेनाइट

अरावली की प्रमुख चोटियाँ

गुरु शिखर

  • राजस्थान की सबसे ऊँची चोटी
  • ऊँचाई लगभग 1722 मीटर
  • माउंट आबू क्षेत्र में स्थित

जलवायु

यहाँ की जलवायु अपेक्षाकृत समशीतोष्ण होती है।

वर्षा मरुस्थलीय क्षेत्र की तुलना में अधिक होती है।


मिट्टी

इस क्षेत्र में पर्वतीय एवं जंगली मिट्टी पाई जाती है।


3. पूर्वी मैदान एवं नदी बेसिन प्रदेश

यह प्रदेश राजस्थान का सबसे उपजाऊ क्षेत्र माना जाता है। यहाँ कृषि का व्यापक विकास हुआ है।

यह क्षेत्र मुख्य रूप से नदियों द्वारा निर्मित मैदानों में फैला हुआ है।


प्रमुख जिले

  • जयपुर
  • भरतपुर
  • दौसा
  • धौलपुर
  • करौली
  • अलवर
  • टोंक

प्रमुख नदी बेसिन

1. चंबल बेसिन

राजस्थान का सबसे महत्वपूर्ण नदी बेसिन

2. बनास बेसिन

बनास नदी और उसकी सहायक नदियाँ

3. माही बेसिन

दक्षिणी राजस्थान में स्थित


प्रमुख विशेषताएँ

1. उपजाऊ मिट्टी

यहाँ मुख्यतः जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है।

2. कृषि प्रधान क्षेत्र

राजस्थान का प्रमुख कृषि क्षेत्र

3. अधिक जनसंख्या

यहाँ जनसंख्या घनत्व अधिक है।

4. सिंचाई सुविधाएँ

नहरों और कुओं के कारण सिंचाई अच्छी है।


प्रमुख फसलें

  • गेहूँ
  • सरसों
  • जौ
  • गन्ना
  • चावल

जलवायु

यह क्षेत्र अर्ध-शुष्क से उप-आर्द्र जलवायु वाला है।


4. दक्षिण-पूर्वी पठारी प्रदेश (हाड़ौती क्षेत्र)

यह प्रदेश राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित है। इसे हाड़ौती का पठार भी कहा जाता है।


प्रमुख जिले

  • कोटा
  • बूंदी
  • बारां
  • झालावाड़

प्रमुख विशेषताएँ

1. पठारी भूमि

यहाँ भूमि का स्वरूप पठारी है।

2. काली मिट्टी

यहाँ काली मिट्टी पाई जाती है जो कृषि के लिए अत्यंत उपयुक्त है।

3. अधिक वर्षा

राजस्थान के अन्य भागों की तुलना में यहाँ वर्षा अधिक होती है।

4. कृषि विकास

यह क्षेत्र कृषि उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है।


प्रमुख फसलें

  • सोयाबीन
  • गेहूँ
  • धान
  • तिलहन

हाड़ौती क्षेत्र का महत्व

यह क्षेत्र चंबल नदी परियोजना तथा जलविद्युत उत्पादन के लिए भी प्रसिद्ध है।


राजस्थान की भू-वैज्ञानिक संरचना

राजस्थान की भू-वैज्ञानिक संरचना अत्यंत प्राचीन मानी जाती है।

यहाँ की चट्टानें मुख्यतः प्री-कैम्ब्रियन काल की हैं।


प्रमुख भू-वैज्ञानिक विशेषताएँ

1. प्राचीन चट्टानें

अरावली क्षेत्र में अत्यंत प्राचीन चट्टानें पाई जाती हैं।

2. मरुस्थलीय भू-आकृतियाँ

थार मरुस्थल में पवन द्वारा निर्मित भू-आकृतियाँ मिलती हैं।

3. चतुर्थक कल्प के अवशेष

मरुस्थलीय क्षेत्रों में चतुर्थक कल्प के अवशेष पाए जाते हैं।


राजस्थान की मिट्टियाँ

राजस्थान में विभिन्न प्रकार की मिट्टियाँ पाई जाती हैं।


1. रेतीली मिट्टी

  • पश्चिमी मरुस्थल में
  • जल धारण क्षमता कम

2. जलोढ़ मिट्टी

  • पूर्वी मैदानों में
  • कृषि के लिए उपयुक्त

3. काली मिट्टी

  • हाड़ौती क्षेत्र में
  • कपास एवं सोयाबीन के लिए उपयुक्त

4. पर्वतीय मिट्टी

  • अरावली क्षेत्र में
  • वनस्पति के लिए उपयुक्त

राजस्थान की जलवायु

राजस्थान की जलवायु मुख्यतः उष्णकटिबंधीय मानसूनी प्रकार की है।


जलवायु के प्रमुख प्रकार

शुष्क जलवायु

पश्चिमी राजस्थान

अर्ध-शुष्क जलवायु

मध्य राजस्थान

उप-आर्द्र जलवायु

दक्षिण-पूर्वी राजस्थान


राजस्थान की प्राकृतिक वनस्पति

राजस्थान में जलवायु के अनुसार विभिन्न प्रकार की वनस्पतियाँ पाई जाती हैं।

प्रमुख वनस्पतियाँ

  • कंटीली झाड़ियाँ
  • शुष्क वन
  • मिश्रित वन
  • घासभूमि

राजस्थान की प्रमुख नदियाँ

पश्चिमी राजस्थान

  • लूणी

पूर्वी राजस्थान

  • चंबल
  • बनास
  • माही
  • काली सिंध

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • राजस्थान को चार प्रमुख भौगोलिक प्रदेशों में बाँटा गया है।
  • सबसे बड़ा प्रदेश पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश है।
  • अरावली पर्वतमाला राज्य को दो भागों में विभाजित करती है।
  • गुरु शिखर राजस्थान की सबसे ऊँची चोटी है।
  • हाड़ौती क्षेत्र दक्षिण-पूर्वी पठारी प्रदेश कहलाता है।
  • पश्चिमी राजस्थान में रेतीली मिट्टी पाई जाती है।
  • पूर्वी मैदान कृषि के लिए सबसे उपयुक्त क्षेत्र है।

महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1

राजस्थान का सबसे बड़ा भौगोलिक प्रदेश कौन-सा है?
उत्तर – पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश


प्रश्न 2

राजस्थान की सबसे ऊँची चोटी कौन-सी है?
उत्तर – गुरु शिखर


प्रश्न 3

हाड़ौती क्षेत्र राजस्थान के किस भौगोलिक प्रदेश में आता है?
उत्तर – दक्षिण-पूर्वी पठारी प्रदेश


प्रश्न 4

अरावली पर्वतमाला राजस्थान को कितने भागों में विभाजित करती है?
उत्तर – दो भागों में


प्रश्न 5

राजस्थान में जलोढ़ मिट्टी कहाँ पाई जाती है?
उत्तर – पूर्वी मैदान एवं नदी बेसिन क्षेत्र में


अध्ययन के लिए विशेष टिप्स

  • चारों भौगोलिक प्रदेशों की विशेषताओं की तुलना करें।
  • मिट्टी और फसलों को साथ में याद करें।
  • अरावली पर्वतमाला का नक्शा अवश्य देखें।
  • नदी बेसिन और पठारी क्षेत्रों का पृथक अध्ययन करें।
  • सारणी आधारित अध्ययन परीक्षा के लिए उपयोगी रहता है।

निष्कर्ष

राजस्थान के भौगोलिक प्रदेश राज्य की प्राकृतिक विविधता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। पश्चिमी भाग में विशाल थार मरुस्थल, मध्य भाग में अरावली पर्वतमाला तथा पूर्वी एवं दक्षिण-पूर्वी भागों में उपजाऊ मैदान और पठारी क्षेत्र पाए जाते हैं। प्रत्येक प्रदेश की जलवायु, मिट्टी, वनस्पति और कृषि अलग-अलग विशेषताएँ रखती है।

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