मेवाड़ और मारवाड़ चित्रकला शैली
भारतीय चित्रकला की परम्परा में राजस्थानी चित्रकला (Rajasthani Painting) का विशेष स्थान है। राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में विकसित हुई चित्रकला की शैलियाँ न केवल कला की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि वे उस समय के सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन को भी दर्शाती हैं। राजस्थानी चित्रकला के प्रमुख स्कूलों में मेवाड़ शैली और मारवाड़ शैली का विशेष महत्व माना जाता है।
मेवाड़ शैली को राजस्थानी चित्रकला का प्रारंभिक और मौलिक रूप माना जाता है। इस शैली में धार्मिक ग्रंथों, विशेष रूप से कृष्ण लीला और पौराणिक कथाओं का चित्रण प्रमुखता से मिलता है। वहीं मारवाड़ शैली में राजसी जीवन, लोक कथाएँ और वीर गाथाओं का चित्रण देखने को मिलता है।
राजाओं और शासकों के संरक्षण में इन दोनों शैलियों का निरंतर विकास हुआ। विभिन्न चित्रकारों ने अपनी प्रतिभा से इन्हें समृद्ध बनाया। आज भी मेवाड़ और मारवाड़ चित्रकला शैली भारतीय कला इतिहास की महत्वपूर्ण धरोहर मानी जाती हैं।
मेवाड़ शैली (Mewar School of Painting)



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मेवाड़ शैली राजस्थानी चित्रकला की सबसे प्राचीन और मूल शैली मानी जाती है। इसका विकास मुख्य रूप से उदयपुर और मेवाड़ क्षेत्र में हुआ।
मेवाड़ शैली की प्रमुख विशेषताएँ
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चमकीले लाल और पीले रंगों का प्रयोग
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धार्मिक ग्रंथों का चित्रण
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कृष्ण लीला और पौराणिक कथाएँ
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सरल आकृतियाँ और स्पष्ट रेखांकन
मेवाड़ शैली का विकास
| शासक | योगदान |
|---|---|
| महाराणा कुम्भा | मेवाड़ शैली का स्वर्ण युग माना जाता है |
| उदय सिंह (1535–1572) | भागवत पुराण पर आधारित चित्र |
| महाराणा प्रताप | चावंड में चित्रकला का विकास |
| अमर सिंह एवं जगत सिंह | चित्रकला का और अधिक विस्तार |
प्रमुख चित्रकार
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नूरुद्दीन
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मनोहर
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साहिबदीन
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कृपाराम
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जीवराम
इन चित्रकारों ने मेवाड़ शैली को नई पहचान दी।
मेवाड़ शैली की प्रमुख उपशैलियाँ
1. उदयपुर शैली
उदयपुर शैली मेवाड़ चित्रकला का महत्वपूर्ण केंद्र रही।
प्रमुख विशेषताएँ
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लघु चित्रों का विकास
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लाल और पीले रंगों का अधिक उपयोग
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धार्मिक ग्रंथों पर चित्रण
प्रमुख चित्रित ग्रंथ
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गीत गोविंद
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भागवत पुराण
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रामायण
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रसिकप्रिया
महाराणा जगत सिंह ने “चितेरों री ओवरी” नामक कला विद्यालय की स्थापना की, जिसे “तस्वीरों का कारखाना” भी कहा जाता था।
2. नाथद्वारा शैली
नाथद्वारा शैली मेवाड़ चित्रकला का दूसरा महत्वपूर्ण चरण है।
मुख्य विशेषताएँ
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श्रीनाथजी से संबंधित चित्र
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कृष्ण लीला के दृश्य
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मंदिरों के लिए बनाए गए बड़े चित्र
इस शैली में “पिछवाई चित्र” बहुत प्रसिद्ध हैं। ये बड़े कपड़े के पर्दों पर बनाए जाते थे।
मुख्य रंग: हरा और पीला
3. देवगढ़ शैली
देवगढ़ शैली में राजसी जीवन और प्राकृतिक दृश्य का सुंदर चित्रण मिलता है।
मुख्य विषय
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शिकार दृश्य
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श्रृंगार
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राजदरबार
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प्रकृति
प्रमुख चित्रकार
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चौखा
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बैजनाथ
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हरचंद
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बागटा
यह शैली मेवाड़, मारवाड़ और जयपुर शैली का मिश्रण मानी जाती है।
4. चावंड शैली
चावंड शैली का विकास मुख्य रूप से महाराणा प्रताप और अमर सिंह के समय में हुआ।
प्रमुख चित्र
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रागमाला चित्र (1605 ई.)
प्रमुख चित्रकार
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नसीरुद्दीन
इस शैली में संगीत और रागों पर आधारित चित्र बनाए गए।
मारवाड़ शैली (Marwar School of Painting)



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मारवाड़ शैली राजस्थान के पश्चिमी भाग में विकसित हुई। इसका प्रमुख केंद्र जोधपुर था।
तिब्बती इतिहासकार लामा तारनाथ ने 7वीं सदी में मरु प्रदेश के चित्रकार श्रीधर का उल्लेख किया है।
मारवाड़ शैली की विशेषताएँ
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चमकीले रंगों का प्रयोग
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लोक कथाओं का चित्रण
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राजसी जीवन के दृश्य
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वीर गाथाएँ
मारवाड़ शैली की प्रमुख उपशैलियाँ
1. जोधपुर शैली
जोधपुर शैली मारवाड़ चित्रकला की मुख्य शैली मानी जाती है।
प्रमुख शासक
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महाराजा जसवंत सिंह
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महाराजा मानसिंह
प्रमुख चित्रकार
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अमरदास भाटी
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दानाभाटी
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शंकरदास
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नारायणदास
प्रमुख विषय
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सुरसागर
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रसिकप्रिया
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दुर्गा सप्तशती
मुख्य रंग: चमकीला पीला और लाल
2. बीकानेर शैली
बीकानेर शैली पर मुगल और दक्षिणी चित्रकला का प्रभाव देखा जाता है।
प्रमुख कलाकार
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उस्ता मलिराजा
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उस्ता हमीद
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रुकन्नुद्दीन
इस शैली के कई चित्र बीकानेर के सरकारी संग्रहालय में सुरक्षित हैं।
3. किशनगढ़ शैली
किशनगढ़ शैली राजस्थानी चित्रकला की सबसे प्रसिद्ध शैलियों में से एक है।
मुख्य विषय
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राधा-कृष्ण की प्रेम लीलाएँ
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धार्मिक भावनाएँ
प्रमुख चित्रकार
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निहालचंद
प्रसिद्ध चित्र
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“बनी-ठनी”
इस चित्र को कला इतिहासकार एरिक डिक्सन ने “भारत की मोना लिसा” कहा।
4. अजमेर शैली
अजमेर शैली को हिंदू, मुस्लिम और ईसाई शासकों का समान संरक्षण मिला।
प्रसिद्ध चित्र
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राजा पाबूजी का चित्र (1698)
5. जैसलमेर शैली
इस शैली की खास बात यह है कि यह मुगल या जोधपुर शैली से प्रभावित नहीं है।
प्रमुख विषय
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मूमल की कथा
6. नागौर शैली
नागौर किले में इस शैली के सुंदर भित्ति चित्र देखने को मिलते हैं।
7. घाणेराव शैली
यह शैली जोधपुर के दक्षिण में स्थित गोडवाड़ क्षेत्र में विकसित हुई।
Exam ke liye Important Points
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मेवाड़ शैली राजस्थानी चित्रकला की सबसे प्राचीन शैली है।
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महाराणा कुम्भा का काल मेवाड़ शैली का स्वर्ण युग माना जाता है।
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नाथद्वारा शैली में पिछवाई चित्र प्रसिद्ध हैं।
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किशनगढ़ शैली का प्रसिद्ध चित्र बनी-ठनी है।
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मारवाड़ शैली पंचतंत्र चित्रों के लिए प्रसिद्ध है।
Conclusion
मेवाड़ और मारवाड़ शैली राजस्थानी चित्रकला की महत्वपूर्ण धरोहर हैं। इन शैलियों में राजस्थान की संस्कृति, धर्म और समाज का सुंदर चित्रण देखने को मिलता है। विभिन्न शासकों और कलाकारों के संरक्षण से इन शैलियों का निरंतर विकास हुआ।
आज भी राजस्थानी चित्रकला भारतीय कला इतिहास का गौरव मानी जाती है और यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परम्परा को दुनिया के सामने प्रस्तुत करती है।
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