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राजस्‍थान के भौतिक विभाजन

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By NotesMind
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राजस्थान भारत का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य है। इसकी भौगोलिक संरचना अत्यंत विविधतापूर्ण है। राज्य के पश्चिमी भाग में विशाल थार मरुस्थल, मध्य भाग में अरावली पर्वतमाला, पूर्वी भाग में उपजाऊ मैदान तथा दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र में पठारी भू-भाग पाया जाता है। यही विविधता राजस्थान को भौगोलिक दृष्टि से विशेष बनाती है।

राजस्थान के भौतिक विभाग राज्य की जलवायु, मिट्टी, कृषि, वनस्पति, पशुपालन, उद्योग, खनिज संपदा, मानव बसावट तथा सांस्कृतिक जीवन को गहराई से प्रभावित करते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे RPSC, REET, राजस्थान पुलिस, पटवारी, शिक्षक भर्ती और विद्यालयी परीक्षाओं में यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

राजस्थान को सामान्यतः चार प्रमुख भौतिक विभागों में विभाजित किया जाता है—

  • पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश
  • अरावली पर्वतीय प्रदेश
  • पूर्वी मैदानी प्रदेश
  • दक्षिण-पूर्वी पठारी प्रदेश

इन सभी विभागों की अपनी-अपनी भौगोलिक विशेषताएँ, प्राकृतिक संसाधन, जलवायु और आर्थिक महत्व हैं।


राजस्थान का भूगर्भीय परिचय

राजस्थान का भूगर्भीय इतिहास अत्यंत प्राचीन माना जाता है। भूगर्भ वैज्ञानिकों के अनुसार यह क्षेत्र करोड़ों वर्ष पहले समुद्र के नीचे था। समय के साथ पृथ्वी की आंतरिक हलचलों और जलवायु परिवर्तन के कारण यहाँ पर्वत, मैदान और मरुस्थल विकसित हुए।

राजस्थान की भू-संरचना में विभिन्न भूगर्भीय युगों का योगदान माना जाता है।

प्रमुख भूगर्भीय युग

युग प्रमुख विशेषता
प्री-कैम्ब्रियन काल अरावली पर्वतमाला का निर्माण
कैम्ब्रियन काल प्राचीन चट्टानों का विकास
जुरासिक काल पश्चिमी राजस्थान में जीवाश्म अवशेष
टर्शियरी काल खनिज संपदा का विकास
प्लिस्टोसीन युग मरुस्थलीय प्रदेश का विस्तार

भूगर्भीय विशेषताएँ

  • राजस्थान का भूभाग अत्यंत प्राचीन है
  • अरावली विश्व की प्राचीनतम पर्वत श्रेणियों में से एक है
  • पश्चिमी भाग में विशाल मरुस्थल विकसित हुआ
  • राज्य खनिज संपदा से समृद्ध है
  • स्थलाकृति में अत्यधिक विविधता पाई जाती है

राजस्थान के प्रमुख भौतिक विभाग

राजस्थान को निम्न चार प्रमुख भौतिक भागों में विभाजित किया जाता है—

  1. पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश
  2. अरावली पर्वतीय प्रदेश
  3. पूर्वी मैदानी प्रदेश
  4. दक्षिण-पूर्वी पठारी प्रदेश

इन विभागों का निर्धारण मुख्यतः स्थलाकृति, जलवायु, मिट्टी, वर्षा, वनस्पति और जल संसाधनों के आधार पर किया गया है।


1. पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश

परिचय

राजस्थान का पश्चिमी भाग थार मरुस्थल का हिस्सा है। इसे “महान भारतीय मरुस्थल” भी कहा जाता है। यह राज्य के लगभग 60 प्रतिशत क्षेत्र में फैला हुआ है। यहाँ शुष्क जलवायु, अत्यंत कम वर्षा और रेतीली मिट्टी पाई जाती है।

विस्तार

यह प्रदेश मुख्यतः निम्न जिलों में फैला है—

  • जैसलमेर
  • बाड़मेर
  • बीकानेर
  • जोधपुर
  • चूरू
  • नागौर
  • श्रीगंगानगर
  • हनुमानगढ़

प्रमुख विशेषताएँ

  • अत्यंत कम वर्षा
  • गर्म एवं शुष्क जलवायु
  • रेतीली मिट्टी
  • विरल वनस्पति
  • बालुका स्तूपों की अधिकता
  • आंतरिक जल निकास

मरुस्थलीय प्रदेश के उप-विभाग

(1) शुष्क मरुस्थलीय प्रदेश

यह राजस्थान का सबसे शुष्क भाग है।

प्रमुख क्षेत्र
  • जैसलमेर
  • बाड़मेर
विशेषताएँ
  • वार्षिक वर्षा 10–20 सेमी
  • अत्यंत कम जनसंख्या घनत्व
  • रेतीली भूमि
  • ऊँट पालन प्रमुख
वनस्पति
  • खेजड़ी
  • फोग
  • बेर
  • रोहिड़ा

(2) लूणी बेसिन

यह क्षेत्र लूणी नदी के जलग्रहण क्षेत्र में स्थित है।

प्रमुख विशेषताएँ
  • अर्ध-शुष्क जलवायु
  • कृषि एवं पशुपालन दोनों का विकास
  • सिंचाई का सीमित उपयोग
प्रमुख फसलें
  • बाजरा
  • गेहूँ
  • ग्वार

(3) शेखावाटी प्रदेश

यह राजस्थान के उत्तर-पूर्वी मरुस्थलीय भाग में स्थित है।

प्रमुख जिले
  • सीकर
  • झुंझुनूं
  • चूरू
विशेषताएँ
  • बालुका स्तूप
  • व्यापारिक गतिविधियाँ
  • आंतरिक जल निकास प्रणाली

(4) घग्घर मैदान

यह क्षेत्र घग्घर नदी से प्रभावित है।

विशेषताएँ
  • अपेक्षाकृत उपजाऊ भूमि
  • सिंचाई सुविधाएँ
  • कृषि का विकास
प्रमुख फसलें
  • गेहूँ
  • कपास
  • सरसों

पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश की जलवायु

यह क्षेत्र राजस्थान का सबसे गर्म भाग माना जाता है।

ग्रीष्म ऋतु

  • तापमान 48°C तक पहुँच जाता है
  • लू चलती है

शीत ऋतु

  • तापमान में भारी गिरावट
  • रातें अत्यंत ठंडी

वर्षा

  • अत्यंत कम एवं अनियमित

मरुस्थलीय वनस्पति

यहाँ शुष्क जलवायु के अनुरूप वनस्पति पाई जाती है।

प्रमुख वृक्ष

  • खेजड़ी
  • रोहिड़ा
  • फोग
  • थोर
  • बेर

प्रमुख घास

  • सेवण घास
  • धामण घास

पशुपालन

मरुस्थलीय क्षेत्र पशुपालन के लिए प्रसिद्ध है।

प्रमुख पशु

  • ऊँट
  • भेड़
  • बकरी

आर्थिक महत्व

  • ऊन उद्योग
  • डेयरी
  • पशु व्यापार

इंदिरा गांधी नहर परियोजना

यह परियोजना पश्चिमी राजस्थान के लिए जीवनरेखा सिद्ध हुई है।

लाभ

  • सिंचाई सुविधाओं का विस्तार
  • कृषि विकास
  • पेयजल उपलब्धता
  • मरुस्थलीकरण में कमी

2. अरावली पर्वतीय प्रदेश

परिचय

अरावली पर्वतमाला विश्व की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है। यह राजस्थान को पश्चिमी और पूर्वी भागों में विभाजित करती है।

यह पर्वतमाला दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व दिशा में फैली हुई है।


विस्तार

अरावली पर्वतमाला निम्न जिलों से होकर गुजरती है—

  • सिरोही
  • उदयपुर
  • राजसमंद
  • अजमेर
  • जयपुर
  • अलवर

प्रमुख विशेषताएँ

  • प्राचीन पर्वत श्रृंखला
  • खनिज संपदा की प्रचुरता
  • वन संपदा
  • पर्यटन केंद्र
  • जलवायु विभाजक

अरावली पर्वतीय प्रदेश के उप-विभाग

(1) दक्षिणी अरावली प्रदेश

यह अरावली का सबसे ऊँचा भाग है।

प्रमुख जिले

  • सिरोही
  • उदयपुर
  • राजसमंद

प्रमुख चोटियाँ

चोटी ऊँचाई
गुरु शिखर 1722 मीटर
सेर 1597 मीटर
दिलवाड़ा 1442 मीटर
जरगा 1431 मीटर

गुरु शिखर

यह राजस्थान की सबसे ऊँची चोटी है।

विशेषताएँ

  • ऊँचाई – 1722 मीटर
  • माउंट आबू में स्थित
  • पर्यटन एवं धार्मिक महत्व

(2) मध्य अरावली प्रदेश

यह भाग अजमेर और आसपास के क्षेत्रों में फैला है।

प्रमुख चोटियाँ

  • तारागढ़
  • नाग पहाड़

विशेषताएँ

  • घाटियाँ एवं दर्रे
  • ऐतिहासिक महत्व
  • पर्यटन स्थल

(3) उत्तरी-पूर्वी अरावली प्रदेश

यह क्षेत्र जयपुर, अलवर और सीकर तक फैला है।

प्रमुख चोटियाँ

चोटी ऊँचाई
रघुनाथगढ़ 1055 मीटर
खोज 920 मीटर
बैराठ 704 मीटर

अरावली पर्वतमाला का महत्व

(1) जलवायु पर प्रभाव

अरावली पर्वतमाला राजस्थान की जलवायु को प्रभावित करती है। यह पश्चिमी शुष्क प्रदेश और पूर्वी उपजाऊ क्षेत्रों के बीच विभाजक का कार्य करती है।

(2) वन संपदा

राज्य के अधिकांश वन अरावली क्षेत्र में पाए जाते हैं।

(3) खनिज संपदा

यह क्षेत्र खनिजों से अत्यंत समृद्ध है।

प्रमुख खनिज

  • संगमरमर
  • जस्ता
  • तांबा
  • सीसा
  • ग्रेनाइट

(4) पर्यटन महत्व

  • माउंट आबू
  • दिलवाड़ा मंदिर
  • रणकपुर मंदिर
  • कुंभलगढ़

(5) जल संरक्षण

अरावली जल स्रोतों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।


3. पूर्वी मैदानी प्रदेश

परिचय

यह प्रदेश अरावली पर्वतमाला के पूर्व में स्थित है। यहाँ पर्याप्त वर्षा, उपजाऊ मिट्टी और कृषि का अच्छा विकास पाया जाता है।


विस्तार

इस क्षेत्र में निम्न जिले शामिल हैं—

  • जयपुर
  • भरतपुर
  • अलवर
  • धौलपुर
  • करौली
  • दौसा
  • सवाई माधोपुर
  • टोंक

प्रमुख विशेषताएँ

  • उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी
  • पर्याप्त वर्षा
  • घनी आबादी
  • कृषि प्रधान क्षेत्र
  • सिंचाई सुविधाएँ

पूर्वी मैदानी प्रदेश के उप-विभाग

(1) बनास-बाणगंगा बेसिन

यह क्षेत्र बनास एवं बाणगंगा नदियों द्वारा निर्मित है।

विशेषताएँ

  • उपजाऊ भूमि
  • सिंचित कृषि
  • गेहूँ एवं सरसों उत्पादन

(2) चंबल बेसिन

यह क्षेत्र चंबल नदी से प्रभावित है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • बीहड़ भूमि
  • सिंचित कृषि
  • जल विद्युत परियोजनाएँ

(3) मध्य माही मैदान

यह क्षेत्र दक्षिणी राजस्थान में फैला है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • काली मिट्टी
  • कपास उत्पादन
  • कृषि विकास

आर्थिक गतिविधियाँ

कृषि

यह राजस्थान का सबसे उपजाऊ क्षेत्र माना जाता है।

प्रमुख फसलें

  • गेहूँ
  • सरसों
  • जौ
  • गन्ना
  • बाजरा

उद्योग

  • सीमेंट उद्योग
  • वस्त्र उद्योग
  • खाद्य प्रसंस्करण उद्योग

परिवहन

यह क्षेत्र सड़क एवं रेल मार्गों से अच्छी तरह जुड़ा है।


4. दक्षिण-पूर्वी पठारी प्रदेश

परिचय

यह प्रदेश राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित है। इसे हाड़ौती पठार भी कहा जाता है।


विस्तार

यह क्षेत्र निम्न जिलों में फैला है—

  • कोटा
  • बूंदी
  • बारां
  • झालावाड़

प्रमुख विशेषताएँ

  • पठारी भू-आकृति
  • काली मिट्टी
  • पर्याप्त वर्षा
  • सिंचित कृषि

हाड़ौती पठार

यह राजस्थान का प्रमुख पठारी क्षेत्र है।

विशेषताएँ

  • चंबल नदी का प्रभाव
  • उपजाऊ काली मिट्टी
  • सिंचाई सुविधाएँ

मुकंदरा पहाड़ियाँ

यह क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य और वन्य जीवों के लिए प्रसिद्ध है।

विशेषताएँ

  • वन संपदा
  • जैव विविधता
  • पर्यटन महत्व

आर्थिक विशेषताएँ

कृषि

यहाँ सिंचित कृषि का व्यापक विकास हुआ है।

प्रमुख फसलें

  • सोयाबीन
  • गेहूँ
  • चावल
  • गन्ना

उद्योग

  • उर्वरक उद्योग
  • सीमेंट उद्योग
  • ताप विद्युत परियोजनाएँ

खनिज

  • चूना पत्थर
  • बलुआ पत्थर

राजस्थान की मिट्टियाँ

राजस्थान में विभिन्न प्रकार की मिट्टियाँ पाई जाती हैं।

1. रेतीली मिट्टी

  • पश्चिमी राजस्थान में
  • जल धारण क्षमता कम

2. काली मिट्टी

  • दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र में
  • कपास के लिए उपयुक्त

3. जलोढ़ मिट्टी

  • पूर्वी मैदानों में
  • अत्यंत उपजाऊ

4. लाल मिट्टी

  • दक्षिणी राजस्थान में
  • लौह तत्व की अधिकता

राजस्थान की जलवायु

राजस्थान की जलवायु सामान्यतः शुष्क एवं अर्ध-शुष्क है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • कम वर्षा
  • उच्च तापमान
  • मरुस्थलीय प्रभाव
  • क्षेत्रीय विविधता

वर्षा वितरण

क्षेत्र वर्षा
पश्चिमी राजस्थान अत्यंत कम
पूर्वी राजस्थान अधिक
दक्षिणी राजस्थान मध्यम

राजस्थान की नदियाँ और भौतिक विभाग

पश्चिमी राजस्थान

  • लूणी नदी
  • घग्घर नदी

पूर्वी राजस्थान

  • बनास नदी
  • बाणगंगा नदी
  • चंबल नदी

दक्षिणी राजस्थान

  • माही नदी

राजस्थान की वनस्पति

मरुस्थलीय वनस्पति

  • खेजड़ी
  • फोग
  • रोहिड़ा

पर्वतीय वनस्पति

  • सालर
  • बांस
  • नीम

मैदानी वनस्पति

  • कृषि फसलें
  • घासभूमि

राजस्थान की प्राकृतिक समस्याएँ

1. मरुस्थलीकरण

पश्चिमी राजस्थान में मरुस्थल का विस्तार एक बड़ी समस्या है।

2. जल संकट

कम वर्षा के कारण जल की कमी बनी रहती है।

3. मिट्टी अपरदन

हवा और पानी द्वारा मिट्टी का कटाव होता है।

4. वन विनाश

वनों की कटाई से पर्यावरणीय असंतुलन बढ़ रहा है।


पर्यावरण संरक्षण एवं प्रमुख परियोजनाएँ

संरक्षण के उपाय

  • वृक्षारोपण
  • जल संरक्षण
  • वन संरक्षण
  • सिंचाई परियोजनाएँ

प्रमुख परियोजनाएँ

  • इंदिरा गांधी नहर परियोजना
  • चंबल घाटी परियोजना
  • माही बजाज सागर परियोजना

राजस्थान के भौतिक विभागों का आर्थिक महत्व

कृषि विकास

पूर्वी एवं दक्षिण-पूर्वी क्षेत्रों में कृषि का अधिक विकास हुआ है।

खनिज संपदा

अरावली क्षेत्र खनिजों से समृद्ध है।

पर्यटन

मरुस्थल, पर्वत और वन्य जीव पर्यटन को बढ़ावा देते हैं।

उद्योग

खनिज आधारित उद्योगों का विकास हुआ है।


प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

तथ्य जानकारी
थार मरुस्थल पश्चिमी राजस्थान
गुरु शिखर सबसे ऊँची चोटी
अरावली विश्व की प्राचीन पर्वतमाला
चंबल बारहमासी नदी
हाड़ौती पठार दक्षिण-पूर्वी राजस्थान

महत्वपूर्ण जिले

क्षेत्र प्रमुख जिले
मरुस्थलीय प्रदेश जैसलमेर, बाड़मेर
अरावली प्रदेश सिरोही, उदयपुर
मैदानी प्रदेश जयपुर, भरतपुर
पठारी प्रदेश कोटा, बूंदी

राजस्थान के भौतिक विभागों का सांस्कृतिक प्रभाव

राजस्थान की भौगोलिक विविधता ने यहाँ की संस्कृति को भी प्रभावित किया है।

मरुस्थलीय संस्कृति

  • ऊँट संस्कृति
  • लोकगीत एवं लोकनृत्य
  • रंग-बिरंगे वस्त्र

पर्वतीय संस्कृति

  • आदिवासी संस्कृति
  • वन आधारित जीवन

मैदानी संस्कृति

  • कृषि प्रधान जीवन
  • मेले एवं उत्सव

निष्कर्ष

राजस्थान के भौतिक विभाग राज्य की प्राकृतिक पहचान का आधार हैं। पश्चिमी मरुस्थल, अरावली पर्वतमाला, उपजाऊ मैदानी क्षेत्र और दक्षिण-पूर्वी पठार राज्य को भौगोलिक विविधता प्रदान करते हैं। इन भौतिक विभागों ने राजस्थान की जलवायु, कृषि, वनस्पति, संस्कृति, उद्योग और मानव जीवन को गहराई से प्रभावित किया है।

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