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राजस्थान के विवाह रीति-रिवाज और सामाजिक प्रथाएं

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By NotesMind
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राजस्थान की 'रंगीली संस्कृति' केवल मेलों और त्योहारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ के जीवन के हर पड़ाव—जन्म, विवाह और मृत्यु—से जुड़ी रस्में इसे विशिष्ट बनाती हैं। इन रीति-रिवाजों में जहाँ एक ओर प्रेम और सम्मान झलकता है, वहीं दूसरी ओर कुछ कुरीतियाँ भी थीं जिन्हें समय के साथ कानूनन समाप्त किया गया। 


1. राजस्थान में विवाह से जुड़ी प्रमुख रस्में (Marriage Rituals)

शादी राजस्थान में एक उत्सव की तरह होती है, जिसमें कई दिनों तक रस्में चलती हैं।

(A) विवाह से पूर्व की रस्में

  • टीका (सगाई): कन्या पक्ष द्वारा वर को तिलक लगाकर सगाई पक्की करना।

  • कुंकुम पत्री: विवाह का पहला निमंत्रण पत्र जो सबसे पहले गणेश जी (रणथंभौर) को भेजा जाता है।

  • पीठी (बान बैठाना): दूल्हा-दुल्हन को तेल और हल्दी चढ़ाना। इसके बाद वे घर से बाहर नहीं निकलते।

  • बिंदोली: शादी से एक दिन पहले दूल्हा/दुल्हन को घोड़े पर बिठाकर पूरे गांव में जुलूस निकालना।

  • लघु-लाग (पीली चिट्ठी): विवाह की निश्चित तिथि की सूचना भेजना।

(B) विवाह के समय की मुख्य रस्में

  • समेला (मधुपर्क): जब बारात वधू के घर पहुँचती है, तो वधू का पिता बारात का स्वागत करता है। इसे 'ठुमाव' भी कहते हैं।

  • तोरण मारना: विजय का प्रतीक। दूल्हा घर के मुख्य द्वार पर लगे लकड़ी के तोरण को अपनी तलवार या छड़ी से छूता है।

  • पाणिग्रहण (हथलेवा): वर-वधू के हाथ मिलाना, जो उनके मिलन का प्रतीक है।

  • गठबंधन (छेड़ा-छेड़ी): वर के दुपट्टे और वधू की ओढ़नी को बांधना।

  • बड़ी पड़ला: वर पक्ष द्वारा वधू के लिए लाए गए कपड़े और गहने।

(C) विवाह के पश्चात की रस्में

  • पहरावनी (रंगबाड़ी): विदाई के समय बारात के प्रत्येक सदस्य को उपहार देना।

  • कंवरी कलेवा: दूल्हे को ससुराल में पहली बार दिया जाने वाला कलेवा (नाश्ता)।

  • मुकलावा (गौना): यदि विवाह कम उम्र में हो गया हो, तो वयस्क होने पर लड़की को दोबारा ससुराल भेजना।

  • बड़ार: विवाह के अगले दिन दिया जाने वाला सामूहिक भोज।


2. जन्म से संबंधित संस्कार (Birth Rituals)

राजस्थान में बच्चे के जन्म को 'शुभ' माना जाता है और कई रस्में निभाई जाती हैं:

  • आठवा पूजन: गर्भावस्था के आठवें महीने में किया जाने वाला पूजन।

  • जलवा (कुआं पूजन): बच्चे के जन्म के लगभग 1.5 महीने बाद जच्चा (माँ) द्वारा कुआं पूजा जाता है। यह जल देवता के प्रति सम्मान है।

  • नामकरण: पंडित द्वारा राशि के अनुसार बच्चे का नाम रखना।

  • झुला/ढुंढ: बच्चे की पहली होली पर ननिहाल पक्ष से उपहार आना।

  • जडूला (मुंडन): किसी लोक देवता के स्थान पर बच्चे के पहली बार बाल कटवाना।


3. मृत्यु एवं शोक की रस्में (Death Rituals)

राजस्थानी समाज में मृत्यु के बाद भी कई महत्वपूर्ण रस्में होती हैं जो परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं:

  • बैकुंठी: मृतक को ले जाने वाली बांस की सीढ़ी। इस पर सिक्के फेंकने को 'बखेर' कहते हैं।

  • कपाल क्रिया: दाह संस्कार के समय मुखाग्नि देने वाले द्वारा मृतक के सिर पर प्रहार करना।

  • सातरवाड़ा: मृत्यु के बाद 12 दिनों तक शोक संवेदना व्यक्त करने की परंपरा।

  • मौसर (नुक़्ता): मृत्यु भोज (सामाजिक बुराई, फिर भी प्रचलित)।

  • जोसर: व्यक्ति द्वारा अपने जीवित रहते ही अपना मृत्यु भोज कर देना।

  • आधेटा: श्मशान ले जाते समय रास्ते में दिशा परिवर्तन करना।


4. राजस्थान की सामाजिक कुरीतियाँ और उन पर प्रतिबंध (Social Evils & Laws)

परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है कि किस रियासत ने सबसे पहले किस प्रथा पर रोक लगाई।

प्रथा विवरण प्रथम प्रतिबंध (रियासत)
सती प्रथा पति के साथ चिता पर जलना बूंदी (1822)
कन्या वध नवजात कन्या की हत्या कोटा (1833)
त्याग प्रथा चारण-भाटों को अत्यधिक दान जोधपुर (1841)
डाकन प्रथा महिलाओं को डायन घोषित करना मेवाड़/उदयपुर (1853)
बाल विवाह कम आयु में विवाह जोधपुर (1885 - प्रताप सिंह)

महत्वपूर्ण एक्ट (Important Laws):

  • शारदा एक्ट (1929): हरविलास शारदा (अजमेर) के प्रयासों से बाल विवाह पर रोक।

  • सती निवारण अधिनियम (1987): रूपकंवर (देवराला, सीकर) कांड के बाद लागू।


5. आदिवासी समुदायों की विशेष प्रथाएं (Tribal Customs)

  • नाता प्रथा: पत्नी अपने पति को छोड़कर दूसरे पुरुष के साथ रह सकती है (पुनर्विवाह का एक रूप)।

  • झगड़ा राशि: नाता करने वाले पुरुष द्वारा पूर्व पति को दी जाने वाली हर्जाना राशि।

  • मोताना: किसी की मृत्यु होने पर दोषी पक्ष से वसूला जाने वाला हर्जाना (भील समुदाय में प्रचलित)।

  • हाली प्रथा: बंधुआ मजदूरी का एक रूप।


6. परीक्षा के लिए 'Quick Revision' Points

  1. बड़ार क्या है? - विवाह भोज।

  2. काकण डोरा - दूल्हा-दुल्हन के हाथ में बांधा जाने वाला रक्षा सूत्र।

  3. सामेला - बारात का स्वागत।

  4. ओलंदी - नवविवाहिता के साथ जाने वाली सहेली या लड़की।

  5. बखेर - अर्थी पर फेंके जाने वाले पैसे।


7. FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

Q1. राजस्थान में सबसे पहले सती प्रथा पर रोक कहाँ लगी?

उत्तर: 1822 में बूंदी रियासत में।

Q2. 'मुकलावा' या 'गौना' का क्या अर्थ है?

उत्तर: विवाह के बाद वधू के वयस्क होने पर उसे स्थाई रूप से ससुराल भेजना।

Q3. 'समेला' रस्म कब की जाती है?

उत्तर: बारात के स्वागत के समय।

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